दुनिया के सबसे अमीर बिजनेसमैन इलॉन मस्क ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों यानी EVM से न कराने की सलाह दी है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट X पर किए गए पोस्ट में लिखा- इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को खत्म कर देना चाहिए। इसे इंसानों या AI द्वारा हैक किए जाने का खतरा है, हालांकि ये खतरा कम है, फिर भी बहुत ज्यादा है। मस्क ने यह बात अमेरिका के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर की एक पोस्ट को रीट्वीट करके कही। कैनेडी जूनियर ने एक पोस्ट के जरिए प्यूर्टो रिको के चुनावों में EVM से जुड़ी अनियमितताओं के बारे में बताया था। कैनेडी ने पोस्ट में लिखा था- ‘प्यूर्टो रिको के प्राइमरी इलेक्शन में EVM से वोटिंग के दौरान कई अनियमितताएं सामने आई थीं। सौभाग्य से यह एक पेपर ट्रेल था, इसलिए समस्या की पहचान की गई और वोटों की गिनती को सही किया गया। सोचिए उन क्षेत्रों में क्या होता होगा, जहां कोई पेपर ट्रेल नहीं है?’ ‘अमेरिकी नागरिकों के लिए यह जानना आवश्यक है कि उनके प्रत्येक वोट की गणना की गई है। उनके चुनावों में कोई सेंध नहीं लगाई जा सकती। चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप से बचने के लिए उन्हें पेपर बैलेट पर वापस लौटना होगा।’ अमेरिका में नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव होंगे। इसमें डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति जो बाइडेन और रिपब्लिक पार्टी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का उम्मीदवार होना तय माना जा रहा है। उधर, कांग्रेस सासंद राहुल गांधी ने इलॉन मस्क की पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए लिखा- भारत में EVM ब्लैक बॉक्स की तरह है। किसी को भी इसकी जांच की अनुमति नहीं है। हमारी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। जब संस्थानों में जवाबदेही की कमी हो जाती है तो लोकतंत्र एक दिखावा बन जाता है और धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है। भारत में भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था मामला
इसी साल अप्रैल में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के वोटों और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) पर्चियों की 100% क्रॉस-चेकिंग की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में इस मांग से जुड़ी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इसके अलावा कई पॉलिटिकल पार्टियों से जुडे़ लोग EVM पर सवाल उठाते रहे हैं। गूगल और माइक्रोसॉफ्ट सहित कई कंपनियों लॉन्च किए AI प्लेटफॉर्म
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI हमारे जीवन के कई पहलुओं को प्रभावित कर चुकी है। AI का इस्तेमाल दवाइयों, तस्बीर या वीडियो बनाने, कारों की असेम्बली जैसे बहुत सारे कामों के लिए हो रहा है। गूगल और माइक्रोसॉफ्ट सहित कई कंपनियों ने अपने AI प्लेटफॉर्म लॉन्च किए हैं। AI को लेकर डिजिटल इंडिया बिल ला सकती है सरकार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जनरेट किए गए डीपफेक वीडियो और कंटेंट पर रोक लगाने के लिए मोदी सरकार डिजिटल इंडिया बिल लाने वाली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस विधेयक में AI टेक्नोलॉजी के बेहतर उपयोग और तरीकों पर चर्चा होगी। सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस बिल के लिए विपक्षी दलों के समर्थन की भी कोशिश करेगी।