रूस के रोस्तोव शहर की जेल में बंद आतंकी संगठन ISIS के 6 सदस्यों ने रविवार (16 जून) को दो गार्ड्स को बंधक बना लिया था। रूस की स्पेशल फोर्स ने गार्ड्स को छुड़ाने के लिए स्पेशल ऑपरेशन चलाया और उनको बचा लिया है। इस दौरान ISIS के कई सदस्यों की भी मौत हो गई। इससे पहले ISIS के सदस्यों ने गार्ड्स को छोड़ने के बदले वे खुद को रिहा किए जाने की मांग की थी। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इनमें कुछ लोग ऐसे थे जिन्हें आतंक फैलाने के मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। पुलिसकर्मी घटनास्थल पर मौजूद हैं। इंटरफैक्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ISIS के आतंकियों ने वहां से सुरक्षित जाने की इजाजत और एक कार मांगी थी। रूसी स्टेट मीडिया RIA ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान जेल के आसपास के इलाकों में ट्रैफिक व्यवस्था को रोककर सड़कें बंद कर दी गई थीं। आतंकी जेल की खिड़की तोड़ गार्ड्स के रूम में घुसे और चाकू-कुल्हाड़ी की मदद से जेल अधिकारियों को बंधक बना लिया था। ISIS की खुरासान विंग ने किया था आतंकी हमला, 150 लोग मारे गए थे
इससे पहले रूस की राजधानी मॉस्को में 22 मार्च को आतंकी हमला हुआ था। इसे ISIS ने ही अंजाम दिया था। क्रोकस सिटी हॉल में सेना की वर्दी पहने 5 आतंकियों ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं, बम फेंके और फरार हो गए थे। इस हमले में करीब 150 लोगों की मौत हुई थी। हमले की जिम्मेदारी लेते हुए आतंकी संगठन ने कहा था, ”इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने रूस की राजधानी मॉस्को के बाहरी इलाके क्रास्नोगोर्स्क शहर में ईसाइयों की एक बड़ी सभा पर हमला किया, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए और घायल हो गए और उनके सुरक्षित रूप से अपने ठिकानों पर लौटने से पहले उस जगह पर भारी तबाही हुई। हमला करने के बाद हमारे लड़ाके मौके से भाग निकले।” रूस के पूर्व राष्ट्रपति और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी चेयरपर्सन​​​​​​ दिमित्री मेदवेदेव ने कहा था कि रूस खून का बदला खून से लेगा। आतंकवादी सिर्फ आतंक की भाषा ही समझते हैं। जब तक बल का मुकाबला बल से नहीं किया जाता और आतंकवादियों की मौत के साथ-साथ उनके परिवारों पर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक किसी भी जांच का कोई मतलब नहीं। ISIS ने रूस में हमला क्यों किया था…
BBC ने अपनी रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स के हवाले से लिखा था- हमला ISIS की खुरासान विंग यानी ISIS-K ने किया। ISIS-K का नाम उत्तरपूर्वी ईरान, दक्षिणी तुर्कमेनिस्तान और उत्तरी अफगानिस्तान में आने वाले क्षेत्र के नाम पर रखा गया है। यह संगठन सबसे पहले 2014 में पूर्वी अफगानिस्तान में एक्टिव हुआ। तब रूस के उग्रवादी समूहों के कई लड़ाके इसमें शामिल होने सीरिया पहुंच गए। ये पुतिन और उनके प्रोपागेंडा का विरोध करते हैं। इनका कहना है कि पुतिन की सरकार चेचन्या और सीरिया में हमले कर मुसलमानों पर अत्याचार करती है। अफगानिस्तान ने मुसलमानों पर इसी तरह के अत्याचार रूस ने सोवियत काल के दौरान किए थे। पुतिन 18 मार्च को 5वीं बार रूस के राष्ट्रपति बने। 5 दिन बाद यह बड़ा आतंकी हमला हुआ। फिलहाल पुतिन ने हमले पर कोई बयान नहीं दिया है।