वायू प्रदूषण की वजह से दुनिया भर में 2021 में करीब 81 लाख लोगों की मौत हुई। ये दुनिया भर में हुई कुल मौतों का 12% है। मरने वालों में आधे भारत और चीन से हैं। हेल्थ इफेक्ट इंस्टीट्यूट (HEI) की रिपोर्ट के मुताबिक वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा चीन में 23 लाख और उसके बाद भारत में 21 लाख लोगों की मौत हुई। सबसे अधिक भारत में बच्चों की मौत
HEI यूनीसेफ से जुड़ी एक अमेरिकी संस्था है। इसकी रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में भारत में सबसे ज्यादा 1,69,400 बच्चों की मौत वायु प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों की वजह से हुई। ये सभी बच्चे 5 साल से कम उम्र के थे। भारत के बाद सबसे ज्यादा नाइजीरिया (1,14,100), पाकिस्तान (68,100), इथोपिया (31,000) और बांग्लादेश (19,100) में बच्चों की मौत हुई। PM 2.5 से सबसे अधिक मौत
हेल्थ इफेक्ट इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रांसपोर्ट, आवास, जंगलों की आग और जीवाश्म ईंधन आदि से उत्पन्न होने वाले PM 2.5 जैसे प्रदूषक 90% मौतों की वजह हैं। इसके अलावा लाखों लोग घातक एवं गम्भीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि PM 2.5 के अलावा घरेलू वायु प्रदूषण, गाड़ियों के धुएं में पाए जाने वाले ओजोन गैस और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड भी वैश्विक स्तर पर लोगों की गिरती सेहत के लिए जिम्मेदार हैं। वायु प्रदूषण से भारत ही नहीं, पूरा दक्षिण एशिया प्रभावित
HEI की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि साउथ एशिया में सबसे अधिक मौत वायु प्रदूषण की वजह से ही हो रही है। इसके बाद हाई ब्लड प्रेशर, खान-पान और तंबाकू का नंबर आता है।
बच्चों में दिखाई देने वाले प्रदूषण संबंधी स्वास्थ्य प्रभावों में समय से पहले जन्म, कम वजन, अस्थमा और फेफड़ों की बीमारियां हो सकती हैं।
ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज पर आधारित अनुमान के मुताबिक दक्षिण एशिया में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में वायु प्रदूषण से जुड़ी मृत्यु दर 100,000 में 164 है, जबकि दुनिया में ये औसत 100,000 में 108 है। वायु प्रदूषण का सबसे अधिक बच्चों पर असर
रिपोर्ट में कहा गया है वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों में देखा जा रहा है। बच्चे अशुद्ध हवा की वजह से होने वाली बीमारियों के लिए संवेदनशील होते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि एयर पॉल्यूशन की वजह से होने वाला नुकसान गर्भ में ही शुरू हो जाता है, जिसका हेल्थ पर जीवन भर असर पड़ सकता है। बच्चों में वायु प्रदूषण के कारण समय से पहले जन्म, कम वजन, अस्थमा और फेफड़ों की बीमारियां हो सकती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में दक्षिण एशिया में कुपोषण के बाद सबसे अधिक मौत वायु प्रदूषण की वजह से हुई। HEI में वैश्विक स्वास्थ्य की प्रमुख, डॉक्टर पल्लवी ने बताया कि वायु प्रदूषण का असर सबसे अधिक छोटे बच्चों, बुज़ुर्गों तथा निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों पर पड़ रहा है। ऐसे देशों में स्वास्थ्य नीतियां बनाते समय वायु प्रदूषण के प्रभाव को लेकर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।