एक्ट्रेस सान्या मल्होत्रा अपनी आगामी फिल्म ‘मिसेज’ को लेकर चर्चा में चल रही हैं। इस फिल्म के लिए एक्ट्रेस ने न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल 2024 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का अवॉर्ड जीता। यह मलयालम फिल्म ‘द ग्रेट इंडियन किचन’ की रीमेक है। दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान सान्या ने बताया कि यह स्ट्रॉन्ग मैसेज देने वाली फिल्म है। एक्ट्रेस ने इस फिल्म की तैयारी के अलावा अपने सक्सेस और स्ट्रगल के बारे में बात करते हुए कहा कि बॉलीवुड में कम से कम शनिवार और रविवार को छुट्टी होनी ही चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले दो सालो में बैक टु बैक फिल्में की,जिसकी वजह से बहुत सारे फैमिली फक्शन अटेंड नहीं कर पाई। कैसी फीलिंग रही जब आपको बताया गया कि फिल्म ‘मिसेज’ के लिए न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल 2024 सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के अवॉर्ड के लिए आप सेलेक्ट हुई हैं? मैं वहां फिल्म की स्क्रीनिंग के समय नहीं जा पाई थी। मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि पता नहीं लोगों को फिल्म कैसी लगी होगी? अवॉर्ड के बारे में तो मैंने सोचा ही नहीं था। जब मुझे अवॉर्ड के लिए बताया गया तो मेरे लिए बहुत ही सरप्राइस मोमेंट था। मैंने सबसे पहले यह बात अपने फैमिली में शेयर की। इससे सेल्फ ऑफ कॉन्फिडेंस बढ़ता है। ‘मिसेस’ के किरदार में आपको क्या खास बात लगी? इस फिल्म में ऋचा की भूमिका निभा रही हूं। यह बहुत ही चैलेंजिंग किरदार है। यह फिल्म बहुत ही मजबूत संदेश देती है। फिल्म की शूटिंग के दौरान एक यूनिवर्सल फीलिंग रही है। घर में खाना बनाने और साफ सफाई करने वाले औरतों के काम को लोग नजरअंदाज करते हैं। कई लोग तो इसे काम नहीं मानते हैं। खाना बनाना तो एक स्किल है,यह आदमियों को भी आना चाहिए। फिल्म के किरदार ऋचा और आप में क्या समानता है? ऋचा की तरह मुझे भी डांस करना बहुत पसंद है। मेरी ऑनस्क्रीन डांस करने की जो तमन्ना थी वह इस फिल्म से पूरी होने जा रही है। ऋचा की तरह मैं भी बहुत ही महत्वाकांक्षी हूं। असमानता सिर्फ यह है कि ऋचा शादी शुदा है और मैं शादीशुदा नहीं हूं। यह मलयालम फिल्म ‘द ग्रेट इंडियन किचन’ की रीमेक है, हिंदी पट्टी के दर्शकों के हिसाब से इसे कितना अडॉप्ट किया गया है? जब तक फिल्म का ट्रेलर नहीं आ जाता है, इस बारे में ठीक से नहीं पता पाऊंगी। यह एक ऐसी स्टोरी है, जिसे हर भाषा में बताना जरूरी है। इस फिल्म की स्टोरी से बहुत लोग रिलेट कर पाएंगे। मैं समझती हूं कि फिल्म का ट्रेलर देखने के बाद लोग समझ पाएंगे कि इसे कैसे अडॉप्ट किया गया है। इस फिल्म को शूट करते समय सबसे बड़ा चैलेंज क्या था? इमोशनली थोड़ा सा चैलेंज रहा है। वैसे भी एक एक्टर के तौर पर मैं चैलेंजेज ढूंढती रहती हूं। क्योंकि जहां चैलेंज नहीं होता है,वहां काम करने में मजा नहीं आता है। मैं एक्टिंग करते वक्त भूल जाती हूं कि मेरी लाइफ में क्या चल रहा है? जब मैं अपने किरदार और किरदार की जर्नी के बारे में सोचती हूं तब बहुत अच्छा अनुभव होता है। शूटिंग के समय का कोई खास यादें,जिसे आप शेयर करना चाहें? फिल्म की डायरेक्टर आरती कड़व के साथ काम करना सबसे यादगार क्षण रहा है। जब लोग इस फिल्म को देखेंगे तो समझ पाएंगे कि उन्होंने कितनी खूबसूरती से फिल्म को अडॉप्ट करके बनाया है। मैं अपने काम के बारे में कभी बात नहीं करती, क्योंकि अपने काम से मैं खुश नहीं होती हूं। यह फिल्म देखने के बाद कह सकती हूं कि सात साल के अपने करियर में पहली बार इस फिल्म में अपने किरदार से खुश हुई हूं। ‘दंगल’ से लेकर ‘मिसेस’ तक आपकी फिल्मों के चयन का प्रोसेस क्या रहा है? कुछ खास प्रोसेस नहीं होता है। जब मैं स्क्रिप्ट पढ़ती हूं,तभी पता चल जाता है कि मैं उस वर्ल्ड में खुद को इमेजिंग कर रही हूं। जहां मुझे लगता है कि करे या ना करे, कोई दुविधा आती है, तो मैं वह प्रोजेक्ट नहीं करती हूं। मैं हमेशा अपने दिल की बात सुनती हूं। अपने बिजी शेड्यूल में प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ को बैलेंस कैसे करती हैं, अपनी फैमिली और पेरेंट्स के लिए समय कैसे निकाल पाती हैं? काम से ज्यादा मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण फैमिली और पेरेंट्स के लिए समय निकालना है। मैंने लगातार पिछले दो सालो में बैक टु बैक फिल्में की,जिसकी वजह से बहुत सारे फैमिली फक्शन अटेंड नहीं कर पाई। मेरे पेरेंट्स दिल्ली में रहते हैं, सोचती हूं कि थोड़ा सा टाइम निकालकर उनसे मिलने जाऊं। जब अपनी फैमिली के साथ होती हूं, तो थकान भी चली जाती है। आराम करना भी बहुत जरूरी है। उस दौरान कुछ नई चीजें सीखनी भी चाहिए तो आपके जीवन में काम आती है। अब तक के करियर का सबसे बड़ा सक्सेस और स्ट्रगल क्या है? दर्शकों से जो प्रशंसा मिलती है वहीं मेरे लिए सबसे बड़ा सक्सेस है। दर्शकों से मुझे बहुत प्यार मिला है। हमारी कोशिश यही रहती है कि जो फिल्में कर रहे हैं, उससे दर्शक एंटरटेन हों। स्ट्रगल मेरे जीवन में नहीं रहा, भागदौड़ काफी रही है। 21 – 22 में मेरी लाइफ बहुत बिजी रही। मैं ग्रेटफूल हूं कि बैक टु बैक फिल्में कर रही थी। चेन्नई में ‘जवान’ दिल्ली में ‘सैम बहादुर’ की शूटिंग एक ही समय कर रही थी। इतना हेक्टिक शेड्यूल था कि सोने के लिए समय नहीं मिलता था। शनिवार और रविवार को तो बॉलीवुड में छुट्टी होनी ही चाहिए, लेकिन यहां तो रविवार को भी काम करते हैं। पहली फिल्म से लेकर अभी तक फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन बहुत खतरनाक दिखा है? जरूर, ‘दंगल’ में बहुत मस्कुलर बॉडी थी। उसके बाद मैंने ‘फोटोग्राफ’ की तो उसके लिए वजन कम करना पड़ा। ‘बधाई हो’ के लिए और भी वजह कम किया। ‘पटाखा’ के लिए मुझे 15 किलो बढ़ाना पड़ा। वह पीरियड मेरे लिए बहुत मुश्किल था। उस वजन को कम करने में एक साल से ज्यादा समय लगा। डायरेक्टर चाहे बोले या ना बोले हर किरदार के लिए मैं खुद को ट्रेंड करती हूं। एक्टिंग बॉडी से भी होती है। आपके आने वाले प्रोजेक्ट्स कौन- कौन से हैं? वरुण धवन के साथ एक फिल्म ‘सनी संस्कृत की तुलसी कुमारी’ कर रही हूं। ऐसा किरदार अभी तक किसी फिल्म में नहीं निभाया है। बहुत ही मजा आ रहा है। इस फिल्म को लेकर बहुत ही एक्साइटेड हूं। इस फिल्म के लिए डायरेक्टर शशांक खेतान की दिल से आभारी हूं कि उन्होंने मुझे वैसे किरदार के बारे में सोचा। अनुराग कश्यप के साथ एक फिल्म कर रही हूं। फिल्म के सेट पर जब भी जाती हूं तो ऐसा लगता है कि कुछ अच्छा हो रहा है।