बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपने पिता के मुश्किल दौर के बारे में बात की है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि जब उनके पिता वीरप्पा शेट्टी 9 साल की उम्र में मंगलौर से भागकर मुंबई आए थे तो वो रेस्त्रां के बाहर सोते थे। टेबल साफ करते थे। धीरे-धीरे मेहनत के दम पर वो रेस्त्रां ओनर बने। कॉमेडियन भारती सिंह और उनके पति हर्ष लिंबाचिया के पॉडकास्ट में सुनील शेट्टी ने कहा, ‘मेरे पिता बचपन में घर से भागकर मुंबई आ गए थे। यहां आकर उन्होंने साउथ इंडियन रेस्त्रां में नौ साल की उम्र में काम करना शुरू कर दिया। उनकी पहली जॉब टेबल साफ करने की थी। उनके हाथ छोटे थे तो एक टेबल साफ करने में उन्हें चार चक्कर लगाने पड़ते थे। वो चावल की बोरी पर सोया करते थे।’ पिता ने खरीद ली थी तीनों बिल्डिंग सुनील ने बताया कि मेहनत के दम पर उनके पिता काम में तरक्की पाते गए। सुनील बोले, ‘उनके बॉस ने तीन बिल्डिंग खरीदीं और मेरे पिता जी को उन्हें मैनेज करने की जिम्मेदारी दी गई। जब बॉस रिटायर हो गए, पिता जी ने वो तीनों बिल्डिंग खरीद लीं और कैटरिंग का बिजनेस किया। मेरे पास अब भी वो तीनों बिल्डिंग हैं। इस तरह हमारी जर्नी शुरू हुई थी।’ सुनील के पिता का 2017 में निधन हो गया था। 1992 में सुनील ने किया था बॉलीवुड डेब्यू सुनील ने भी पिता के कैटरिंग बिजनेस को कई सालों तक संभाला था। उन्होंने 1992 में फिल्म ‘बलवान’ से बॉलीवुड डेब्यू किया था। इसके बाद सुनील ने वक्त हमारा है (1993), पहचान (1993), दिलवाले (1994), मोहरा (1994), गोपी किशन (1994), कृष्णा (1996) जैसी बेहतरीन फिल्में देते हुए खुद की पहचान बनाई। उनकी बेहतरीन फिल्मों में ‘हेरा फेरी’, ‘धड़कन’, ‘ये तेरा घर ये मेरा घर’, ‘फिर हेरा फेरी’ भी शामिल हैं। भले ही सुनील हिंदी सिनेमा के एक्शन हीरो हैं, लेकिन उनके करियर का पहला अवॉर्ड उन्हें 2001 में फिल्म धड़कन में निगेटिव रोल निभाने के लिए मिला था।