रूस और यूक्रेन के बीच 840 दिनों से जारी जंग के बीच आज स्विट्जरलैंड के बर्जनस्टॉक रिजॉर्ट में पीस समिट की शुरुआत होगी। 2 दिन तक चलने वाला यह शिखर सम्मेलन जंग रोकने के लिए अब तक का चौथा समिट होगा। इससे पहले कोपेनहेगन, जेद्दा और माल्टा में तीन समिट हो चुकी हैं। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, स्विस अधिकारियों ने सम्मेलन के लिए 160 देशों को न्योता दिया था, जिनमें से भारत समेत करीब 90 देशों के लीडर्स या प्रतिनिधि इसमें हिस्सा लेंगे। हालांकि कई बड़े देशों ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था। वहीं रूस को इस समिट के लिए आमंत्रण नहीं भेजा गया है। रूस के अहम सहयोगी चीन ने भी इस समिट से दूर रहने का फैसला किया है। G20 के मौजूदा अध्यक्ष ब्राजील ने भी ऐसा ही किया है। वहीं सऊदी अरब और पाकिस्तान भी समिट में हिस्सा नहीं लेंगे। यूक्रेन के सबसे बड़े समर्थक अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन भी इस समिट में शामिल नहीं होंगे। हालांकि, उनकी जगह उपराष्ट्रपति कमला हैरिस मौजूद होंगी। स्विट्जरलैंड में सुरक्षा के लिए 4 हजार सैनिक तैनात
स्विट्जरलैंड में जुट रहे वर्ल्ड लीडर्स की सुरक्षा के लिए 4 हजार सैनिकों को तैनात किया गया है। इसके अलावा वेन्यू के करीब स्टील की एक रिंग रखी गई है। इसके आसपास के 6.5 किलोमीटर के इलाके में फेंसिंग की गई है। यहां 8 किलोमीटर लंबे तारों का जाल भी बिछाया गया है। स्विट्जरलैंड की मिलिट्री को इलाके में सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी एयरफोर्स लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रही है। वेन्यू के पास बनाए गए हेलीपोर्ट की सुरक्षा के लिए 5 मिलिट्री हेलिकॉप्टर्स तैनात किए गए हैं। इसके अलावा वहां डबल लेयर फेंसिंग भी की गई है। PM मोदी बोले- बातचीत से निकलेगा मसले का हल
समिट से पहले PM मोदी ने शुक्रवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से इटली में मुलाकात की। पीएम ने जेलेंस्की से कहा कि भारत, रूस-यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है। इस जंग के कूटनीति और बातचीत के जरिए ही खत्म किया जा सकता है। इस मुलाकात के बाद जेलेंस्की ने पोस्ट कर कहा कि भारत यूक्रेन पीस समिट में एक हाई-लेवल डेलिगेशन भेज रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समिट में कम से कम 100 देश जुटेंगे। पुतिन बोले- जंग खत्म करने के लिए NATO में शामिल होने की जिद छोड़े यूक्रेन
स्विट्जरलैंड पीस समिट से एक दिन पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भी बयान सामने आया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के खिलाफ जंग तभी रुकेगी जब यूक्रेनी सेना उन चारों इलाकों से पीछे हट जाएगी, जिन पर रूस ने दावा किया है। साथ ही यूक्रेन NATO में शामिल होने की जिद छोड़ देगा। इसके अलावा यूक्रेन को अपनी सीमाओं पर तैनात सेना को भी हटाना होगा और पश्चिमी देशों को रूस पर लगाए प्रतिबंध खत्म करने होंगे। रूस-यूक्रन जंग को दो साल में यह पहली बार है जब पुतिन ने जंग खत्म करने की शर्तें खुलकर सामने रखी हैं। हालांकि पुतिन की इन शर्तों को यूक्रेन ने नकार दिया है। यूक्रेन ने इसे ढोंग और बेतुका बताया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमfर जेलेंस्की ने इस अल्टीमेटम पर कहा कि उन्हें पुतिन पर भरोसा नहीं है। इटली में G7 समिट में उन्होंने कहा कि पुतिन वैसी ही साजिश रच रहे हैं जैसी नाजी लीडर हिटलर ने 1930 और 1940 में यूरोप पर कब्जा करने के लिए रची थीं। हिटलर ने भी कहा था कि चेकोस्लोवाकिया दे दो, तो हम जंग रोक देंगे। पुतिन भी ऐसी बात कर रहे हैं। हम उन पर भरोसा नहीं कर सकते हैं। समिट में यूक्रेन रखेगा 10 पॉइंट का प्लान
यूक्रेन पीस समिट के लिए जेलेंस्की ने 10 पॉइंट का एक प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें जंग खत्म करने के लिए यूक्रेन से रूसी सेना की वापसी समेत कई बिंदुओं को शामिल किया गया है। जेलेंस्की ने प्रस्ताव में मांग की है कि रूस अपनी सेना को यूक्रेन के क्षेत्र से पीछे हटाए। साथ ही वह क्रीमिया समेत उन क्षेत्रों को भी आजाद करे, जिसपर उसने कब्जा कर रखा है।